तेरे गुनाह की सज़ा मुझे क्यों ?
April 24, 2019 • डॉ. इंदिरा मिश्रा

 

बलात्कार से पीड़ित युवती को जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक यंत्रणा झेलनी पड़ती है, यह तो वही समझती है। ऐसे में उस लड़की/महिला को हेय दृष्टि से देखने के बजाय सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। न व एक शहर में किसी लड़की का सामूहिक । बलात्कार हुआ था तो उसके बाद एजुकेशनल फ़ोरम  फॉर वीमेन जस्टिस एंड सोशल वेलफेयर  की टीम के साथ अपनी मानसिक स्थिति को उसने कुछ इस तरह व्यक्त किया था- 'जब  भी बाहर निकलती हैं, लोग कहते हैं देखो-देखो, यही है वो रेप  वाली। मैं यह समझ नहीं पा रही हैं कि यह सब मेरे साथ क्या हो गया। मैं अचानक दूसरे दर्जे की लड़कियों में क्यों आ गई  हूं। मेरा आत्मविश्वास खत्म हो चुका है। मैं एनिमिक हूं, गायनिकल प्रॉब्लम भी है। बात करते हुए हमेशा एक डर सा बना रहता है कि कहीं मेरी बात को निगेटिव ढंग से न ले लिया जाए। मुझे क्या पता था कि रिपोर्ट लिखाने के बाद में लोगों के लिए एक चटाखेदार खवर का हिस्सा बन जाऊंगी।' इसी वक्तव्य के साथ उसके पिता ने भी अपनी वेदना बतायी थी कि जो भी मेरी बेटी के साथ हुआ, वह किसी की भी बेटी के साथ हो सकता है। अब मुझे पुलिस, प्रशासन और अदालतों का सामना करना पड़ेगा। इस घटना के बाद मेरे परिवार की सायकोलॉजी डिस्टर्ब हो गयी है।  बलात्कारी को सजा मिले या छूट जाये, पर बलात्कार से पीड़ित युवती को जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक यंत्रणा झेलनी पड़ती है, यह तो वही जानती है। मनोचिकित्सक प्रांजलि मल्होत्रा कहती हैं कि सबसे बड़ी बात यह हैं कि अपने ही उसे उसे / लानी चाहिए वह अपराधी मानते हैं जो उचित नहीं है। युवती को दोष देने के बजाय घरवाले, नजदीकी रिश्तेदारों और मित्रों को उसे यह अहसास • दिलाना चाहिए कि इस घटना में वह कतई दोषी नहीं है। यह सिर्फ एक दुर्घटना घटना थी जो उसके साथ घट गयी। अपराधी  प्रवृत्ति के लोग किसी  को शिकार बना साथ सकते हैं। उसे यदि इस दुर्घटना के एसपी ( बाद होने वाली कोर्ट शारीरिक, मानसिक दर्ज और भावनात्मक यंत्रणा का समय इलाज उसी तरह कराना है, जैसे किसी अन्य पहचान बीमारी का किया जाता है। समाज का सामना या बहादुरी से करना है। ऐसी युवती को विश्वास पहचानने दिलायें कि परिवार के सदस्य और नजदीकी मित्र सकेहमेशा उसके साथ हैं। उसे अपराधबोध से ग्रसित साथ सब ठीक जरूरी होने की जरूरत नहीं है। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। यह कहकर उसे कभी ताने न दें कि मिलें

सफ़दरजंग  की एनाटॉमी  की निदेशक व् हेड, EFWJSW  के  नशामुक्ति व् महिला सुरक्षा राष्ट्रिय   कॉर्डीनेटर  डॉ. प्रो मंगला कोहली कहती  हैं कि हमलोग ऐसी  युवती के नींद न आने और एंग्जायटी को देखते हुए एंटी एंजियोलिटीन और एंटी डिप्रेसेंट टेबलेट की सलाह देते  हैं तथा NGO  के  माध्यम से  मदद करने के दौरान ऐसी युवती गहराई के साथ सन्देश दिया जाता है  कि परिवार में वह जिसे सबसे अधिक विश्वस्त माने, उसे इस घटना के बारे में बता दे, ताकि उसके मन से वात बाहर आ जाये। संभव हो तो उसे शहर से बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर कुछ समय के लिए ले जायें। उसे रचनात्मक काम करने के लिए बढ़ावा दें। कोई हॉबी विकसित करने को कहें यानी उसे व्यस्त रखें। उसमें आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयल करें। घर का माहौल अच्छा बनाये रखें, ताकि वह अपनी समस्या से उबर सके।ऐसी घटनाओं में मेडिकल ट्रीटमेंट भी बहुत जरूरी है।

जामिया यूनिवर्सिटी के सरोजनी नायडू महिला अध्ययन  केंद्र की निदेशक  व् EFWJSW  की शोध  प्रकोष्ठ  की प्रमुख प्रो डॉ  सबीहा हुसैन बहुत ही मह्त्वपूर्ण हिदायत देते हुए कहती है कि  एक अन्य वात जो नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए कि वलात्कारी को सजा जरूर मिले। ऐसी घटना के बाद परिवार वालों को तुरंत कानूनी सहायता लेनी चाहिये। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता कमलेश जैन का कहना है कि इस घटना के तुरंत वाद कपड़े नहीं बदलने चाहिए। अगर जरूरी हो तो बदलें और उन कपड़ों को रख लें। अपने गुप्त अंगों को धोयें नहीं। थाने में रिपोर्ट लिखाने किसी के साथ जायें, खुद लिखें या किसी से लिखवायें। यदि पुलिस रिपोर्ट दर्ज न करे तो तुरंत शहर के एसपी या आईजी को रजिस्टर्ड लेटर पोस्ट करें। कोर्ट में सीजेएम या सीएमएम दोनों को शिकायत । दर्ज करायें। अपनी शिकायत में घटना की तिथि व समय सही होना चाहिए और अपराधी की कोई पहचान जैसे कोई मस्सा, शक्ल-सूरत, कद-काठी या कोई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी जो अपराधी को पहचानने और पकड़वाने में पुलिस की मदद कर सके, जरूर लिखें।