विश्वास है समाजिक रिश्तों का आधार पुरुष भी हैं जिम्मेदार
April 14, 2019 • डॉ. इंदिरा मिश्रा

             

किसी ने सही कहा है -रिश्तें खून से नही बनते विश्वास से बनते है। अगर विश्वास हो तो पराये भी अपने हो जाते है और अगर विश्वास ना हों तो अपनें भी पराये हो जातें है। किसी भी रिश्ते में विश्वास का होना उस रिश्ते को जिंदा रखने के जैसा होता है। जिस दिन हम रिश्तों में विश्वास खत्म करते है , उसी दिन वह रिश्ता भी वही खत्म हो जाता है। हर इंसान का समाज में दूसरें इंसान के साथ कोई ना कोई संबंध होता है।

 

रिश्तें हमें मर्यादाओ और जिम्मेदारियों से जोड़ते है। अगर हम इन्ही जिम्मेदारियों को इमानदारी के साथ निभायें तो समाज का एक नया स्वरुप देखने को मिलेगा। समाज में महिलाओं  के  सुरक्षा, सम्मान और उसके विकास के लियें उनके साथ जुड़ें रिश्तों को जाननें और समाझनें की जरुरत है। महिला समाज  में एक बेटि के रुप में, मॉ के रुप में, बहन के रुप में, दोस्त के रुप में  और पत्नी के रुप में हो सकती है। इन रिश्तो की अपनी- अपनी मर्यादा होती है। जब तक इंसान इन मर्यादाओं को समझता है और इनके अंतर्गत रेह कर रिश्ता निभाता है तब तक रिश्तो में विश्वास बना रहता है औऱ रिश्ते का अस्तित्व भी समाज में बना रहता है। लोकिन जरा सोचियें की हम इन मर्यादाओं को ही भूल जायें तो समाज का स्वरुप कैसा होगा ?

अगर एसा हूआ तो हममें औऱ जानवर में कोई फर्क नही रहेगा। आज समाज में बहुत सी घटनाए है जिसे जानकर दिल दुखता है। इन सबका कारण महिलाओं के साथ जुड़े रिश्तो मे पुरुषों के द्वारा किया गया विश्वासघात है। आज की पीढ़ी नशा और सैक्स में इतनी जकड़ गई है। की वह रिश्तों के अंदर विश्वास को खत्म करती जा रही है। महिलाओं के साथ आज जो भी कूकृत्य कार्य देखनें को मिलते है वो कही ना कही इस सोच की उपज है जिसके कारण महिलायें खुद को समाज में असुरक्षित मेहसूस करती है उनका किसी भी रिश्ते में भरोसा नही पाता है वो खुद को पिंजरें मे कैद औऱ गुलाम मेहसूस कर रही है। जिस समाज की महिलायें असुरक्षित, शोषित औऱ गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हो तो उस समाज का विकास कैसे संभव हो सकेगा ये विचारणीय बिंदू है।

महिलाओं को सुरक्षित करना उन्हे सश्क्त करने के लिये हमें उनके लिये एक सकारात्कम वातावरण का  निर्माण करने की जरुरत है जहां पुरुषों को महिलाओं से जुड़ें रिश्ते को लेकर जागरुक करने की जरुरत है। जहा पर महिलाओं में बिना किसी डर के आत्म विश्वास पैदा होगा वो खुल कर काम कर सकेंगी और समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी। सभी चिजों में हमें विश्वास को कायम रखने की जरुरत है।