औरत के आत्मबलिदान से बलात्कारी समाज को सबक
January 13, 2020 • डॉ. इंदिरा मिश्रा Sarvangin

जब एक औरत अपने बलात्कार की शिकायत करे तो उस बलात्कारी पुरुष का दडिंत करो वरना वो  किसी और  की गुनाह के  लिए दंडित की जाती रहेगी। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के मंगराई गांव में बलात्कार की शिकार एक औरत ने आत्मबलिदान देकर रात में उसने अपने ऊपर मिट्टी का तेल  छिड़ककर आग लगा ली और जलती हुई हालत में अपने बलात्कारी के घर उसे ललकारने पहुंची। क्या उसका बलात्कारी पकड़ा गया मूल रिपोर्ट में हो सकता है इस बारे में लिखा हो, अनेक सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। हमें सच्चाई को समझने की कोशिश करनी होगी। एक  बलात्कारी औरत से जाति और आर्थिक स्थिति में ऊंचा रहा होगा, वरना जिस औरत के पति व उसके साथ के दो-दो भाई हों,बलात्कार की नीयत होने पर भी बलात्कारी शायद डरता। बहरहाल हमारे लिए अधिक ध्यान देने योग्य बात यह है कि उस औरत ने बलात्कार को चुपचाप सहने की बजाय उसका प्रतिरोध किया और अगर उसके प्रतिरोध के तरीके में आत्मबलिदानी नयापन न होता तो शायद मध्य प्रदेश के इस अनजान से पड़े गांव इस की बलात्कार की यह खबर कभी कहीं न छपती। आजकल बलात्कार की भी वही खबरें चिंता का कारण बनती हैं, जब उनका शिकार उच्च या उच्च मध्यवर्ग की कोई औरत हो। तब अनुमान लगाया जाता है कि अगर उच्च या उच्चमध्यवर्ग की औरत के साथ भी महानगरों तक में यह सब हो सकता है, तो बाकियों के साथ क्या होता होगा, मगर इसके बाद जिज्ञासा का दायरा आगे कभी नहीं बढ़ता और कभी कोई इन बाकी औरतों के बारे में जानने की कोशिश नहीं करता कि उनके साथ वाकई क्या-क्या होता है। जो बात ध्यान आकृष्ट करती है वह इस खबर के बारे में यह है कि बलात्कार की बात अपनों को बतायेगी तो कोई उस पर भरोसा नहीं करेगा पु लिस में खबर कर देने से क्यों रोका होगा, इसका अनुमान लगाने पर एक संभावित उत्तर यह सामने आता है कि उसे विश्वास ही नहीं रहा होगा कि पुलिस उसकी कोई मदद करेगी ।

वे समानेंगे कि इसका चक्कर उस मर्द के साथ चल रहा था तभी तो यह दोपहर में नाले पर गयी, जब कोई वहां नहीं था. ताकि किसी को इनके प्रेम-प्यार का पता न चले और तभी तो उसकी इतनी हिम्मत भी पडी। किसी ने डरें देख लिया होगा तो अपने को सती सावित्री बताने के लिए अब उस पर यह दोष मढ रही  है। उस औरत ने शायद सोचा होगा कि शायद यही रुख घर की औरतों का भी  हो गा उसकी हालत को न समझकर चटखारे ले-लेकर अपने मर्दो तथा अन्य लोगों को किस्से बना-बना कर बताया जाएगा ,मर्द जसमें उसका पति भी शामिल है-भले ही उस बलात्कारी से लड़ने जाये मगर उस पर भी शक जरूर करगा और उसे कलकलंकिनी बताकर मार-पीट कर उस घर से बाहर निकाल देगा। बलात्कार होने के कारण उसक मायके वाले भी उसे अपने साथ नहीं रखेंगे। तब वह कहां जायेगी।इसलिए बलात्कारी द्वारा किये गय अपमान के बाद अब अपनों द्वारा कलंकित और तिरस्कृत किये जाने से बेहतर है कि अपना बलिदान देकर बलात्कारी को उसके  किये की सजा दी जाये। जली हुइ हालत में बलात्कारी के घर जाकर खुलेआम कहा आ बे मरद का बच्चा हो तो अब आ मेरे साथ । बलात्कारी से लिपटकर उसे भी स्वाहा करने का उसका इरादा रहा हो। बहरहाल उसका बलात्कारी जावित बच गया है । पता नहीं कि वह औरत अब जिंदा है या नहीं शायद घटना के यह मोड़ लेने के बाद उस बलात्कारी को पकड़ लिया गया होगा, बलात्कारी शायद अंततः कानून के पंजों से बचा लिया जायेगा-गांव के पुरुष समाज, पालस और उसके वकील द्वारा। हां, वह औरत अगर मर भी गयी होगी तो भी उसने उस बलात्कारी का उस गांव में हमेशा के लिए जीना शायद हराम कर दिया होगा और शक का जो सुई बलात्कार के मामले में हमेशा औरत पर ही घूमती रहती है, वह पुरुष पर अटक गई होगी। लेकिन इस घटना से ग्रामीण इलाके में एक औरत के प्रतिरोध कर सकने की सीमा का भी पता चलता है। वहां औरत शायद ऐसे मामलों में मरकर ही प्रतिरोध कर सकती है। वहां औरत के सामने बलात्कार के मामलों में दो ही रास्ते हैं- या तो प्रतिरोध न करे, जिंदा रहे, किसी को कुछ न बताये और बलात्कारी द्वारा बार-बार ब्लैकमेल की जाती रहे तथा एक दिन पराये मर्द से तथाकथित प्रेम करते हुए पकड़ी जाए और तब शायद मार दी जाए या घर से बाहर निकाल दी जाए या . प्रतिरोध करे तो उसकी कीमत अपना जीवन देकर चुकाए, सजा तब जाकर शायद पुरुष-समाज में यह बात दर्ज हो कि वाकई औरत के साथ बलात्कार जैसी कोई बात होती है जिसमें उसका कोई दोष या इच्छा या सहमति नहीं होती। वह इसके साथ की गई जबर्दस्ती होती है जिसका समर्थ प्रतिकार करने की स्थिति में वह अक्सर नहीं होती। उस औरत ने शायद यह सोचकर भी अपने ऊपर आग लगाई होगी-जैसा कि पुरुष वर्चस्ववाले इस समाज में तमाम औरतों को सोचना सिखा दिया गया है कि पराये मर्द द्वारा किये गये बलात्कार हो या अपने मर्द का [औरतों के साथ उनके मर्द भी उनका असहमति और अनिच्छा के बावजूद जो करते हैं वह भी बलात्कार है] उस औरत ने मरकर भी ग्रामीण समाज के औरतों को एक कड़ा यह संदेश देने की कोशिश की है।