भारतीय संविधान में समानता एवं मौलिक अधिकार
November 30, 2019 • Sarvanginडॉ. इन्दिरा मिश्रा

भारतीय में कई जातियों और धर्म के लोग रहते हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सब लोग अलग-अलग काम करते हैं। संविधान में महिला-पुरूष बराबर हैं। संविधान के तहत सरकार नस्ल, जाति, धर्म और लिंग का भेदभाव नहीं रखेगी। नौकरी, रोजगार और सरकारी दफ्तरों में ख्याल रखा जायेगा कि सबको समान अधिकार एवं अवसर मिलें। महिलाओं की भलाई और कल्याण के लिए सरकार द्वारा विशेष उपाय करने का विधान हैं। सरकार के शासन के नीति निदेशक सिद्वान्तों में यह बात और सही ढंग से कही गई है। इसमें समान काम के लिए समान वेतन, महिलाओं के काम करने के लिए विशेष सुविधाएँ, प्रसूति-राहत और मुफ्त कानूनी सहायता आदि का उल्लेख है। समान वेतन के लिए संसद ने कानून भी बनाये हैं। मूल अधिकार हर नागरिक को दिये गए हैं, जिनके तहत प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार है। धारा 21 के तहत महिलाओं को मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। इसमें आश्रय का अधिकार, कार्य करने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, विधिक सहायता का अधिकार शामिल है। हिंसा एवं हिंसा के भय से मुक्त जीवन जीने का अधिकार इसमें शामिल है।