बिना अपराध बच्चों को जेल
January 14, 2020 • डॉ. इंदिरा मिश्रा Sarvangin

जेलों में पैदा होने वाले बच्चों और अपनी माताओं के साथ जेलों में आने वाले बच्चों को अपराधी न होते हुए भी जेल की सीखों के अन्दर रहने के लिए बाध्य किया जाता है। वे अपने जीवन के रचनात्मक बचपन  जेलों की चार दिवारों के भीतर व्यतीत करते हैं। इन बच्चों के बारे में देश में कोई कानून नहीं है। सभी जेलों में इन बच्चों की देखभाल करने के लिए बालवाडी नहीं हैं और न ही इनमें योग्यता प्राप्त स्टाफ है। इस कारण उनको मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। तिहाड़ दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे बड़ी जेल है जहां 11,000 कैदी है11,000 में से लगभग 500 महिला कैदी हैं यानि कि दोषसिद्ध और विचाराधीन। किसी एक समय में ऐसे लगभग 60 बच्चे अपनी माँओं के साथ होते है जिनकी उम्र 6 साल से कम होती है।