महिला आंदोलन... भारतीय संदर्भ में
January 12, 2020 • डॉ. इंदिरा मिश्रा Sarvangin

हिन्दुस्तान के संदर्भ में महिला की अवधारणा... पर सोच पर कौन से हिन्दुस्तान के बारे में ? यह तो बहुसंस्कृति वाला देश है। बहुत तरह के लोग है और बहुत तरह की धारणायें है। आखिर कौन सी धारणा को हम पकड़ें कि यही अवधारणा हिन्दुस्तान की महिला की अवधारणा है। किस हिन्दुस्तान की बात करें, उसमें किस सोच की बात करें, सोच में किस तरह के परिर्वतन की बात करें और इस परिवर्तन के लिये कौन सा औजार हमारे पास हैं?

मै नारीवादी आन्दोलन से जुड़ी रही हूँ। जब सोचती हूँ कि आखिर वह क्या था जिसके कारण हम इस आंदोलन से जुड़ गये तो एक बात तो यह लगती है कि महिला की अपनी प्रताड़ना या अन्य महिलाओं की प्रताड़ना देखकर महिलायें इस आंदोलन से जुड़ी दूसरा समाज परिवर्तन का एक बड़ा आंदोलन जयप्रकाश जी के नेतत्व में चल रहा था, तो उस आंदोलन से समाज परिवर्तन की जो प्रेरणा महिलाओं को मिली, उसने उन्हें नारीवादी आंदोलन से जोड़ दिया। 

 आंदोलन के सम्बन्ध में जो कुछ पढ़ते थे  उनमें से एक थी अतिवादी नारीवादी (Radical Feminism) की विचारधारा। इसके अनुसार सब बुराइयों का कारण पुरूष था। महिला होना सभी समस्याओं की जड़ था। पुरूष अगर बदल जायेगा तो समस्याओं का हल हो जायेगा। फिर यह माना जाने लगा कि पुरूष और महिला का ही सवाल नहीं है, समाज की बहुत सी संरचनाये है, व्यवस्थाये है जो ये समस्याएं पैदा करती है। एक और विचारधारा थी कि लोक तंत्रीकरण जब बढ़ेगा, महिला की भागीदारी बढ़ेगी तो समस्याये हल हो जायेगी एक दूसरी विचार धारा थी पुरूष-प्रधानता की कि पुरूष प्रधानता के कारण समाज का ढांचा एक खास तरह से बना है जिसमें महिलाओं के लिये समस्याएं निहित है ।

 हम इन्ही विचारधाराओं के तहत सोचते रहे, फिर लगा कि महिला और पुरूष के रिश्तों पर सामाजिक प्रक्रियाओं एवं विचारों का प्रभाव पड़ता है और तब जेण्डर पर जोर दिया जाने लगा जेण्डर महिला आन्दोलन के केन्द्र में आ गयां यह सोचा जाने लगा कि जेण्डर के तहत जो स्त्री-पुरूष सम्बन्ध बन गये है उनको यदि बदल दिया जाये तो स्त्री समस्याओं का समाधान हो जायेगा। यह उसी प्रकार था जैसे यदि जाति का ढांचा बदल दिया जाये तो महिला-पुरूष के रिश्ते में फर्क आ जाता है। अर्न्तजातीय विवाहों में ज्यादातर दहेज की समस्या नही होती है। लड़का-लड़की एक दूसरे को पसन्द करते है, शादी हो जाती है। विरोध होता है लेकिन दहेज को लेकर लम्बी-चौड़ी बातें नहीं होती।