महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी
November 20, 2019 • Sarvangin डॉ. इंदिरा मिश्रा

देश”बदल रहा है महिलाओं कि द"T मे सुधार आ रहा है , समय के साथ साथ नारी भाक्ति और स”क्ति होती जा रही है । परिवर्तन प्रकृति का नियम है ये बात तो सत्य है ,किन्तु परिवर्तन का क्या परिणाम हुआ है और आगे क्या होगा और उस परिर्वतन को आने वाली पिढी को किस प्रकार स्वीकार करती है और इससे क्या सीख लेती है ये बात अधिक महत्व रखती है ।

देखा जाए तो हर युग मे प्रतिभाशाली महिलाए रही है और हर युग में उन्होंने अपनी प्रतिभा से समाज मे उदाहरण प्रस्तुत किया है जैसेसीता, सावित्री, द्वौपदी, गार्गी आदि पौराणिक देवियों से लेकर रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मी बायीं, अहिल्या बाई होल्कर, रानी चेनम्मा, रानी पििद्मनी, हाणी रानी आदि महान रानियों से लेकर इंदिरा गाँधी और किरण बेदी से लेकर सानिया मिर्जा आदि आधुनिक भारत की महिलाओं ने भारत को वि"व भर मे गौरवान्ति किया और महिलाओं ने धरती पर ही नही अपितु अन्तरिक्ष में भी अपना परिचम लहराया है इसमे सुनिता विलियम्स और कल्पना चावला प्रमुख है।

यह सही है कि हर युग में महिलाओं ने अपनी योग्यता का परचम लहराया है,लेकिन फिर भी यह देखने को मिलता है कि हर युग मे उन्हें भेदभाव और उपेक्षा का भी सामना करना पडा है। महिलाओं के प्रति भेदभाव और उपेक्षा को केवल साक्षरता और जागरुकता पैदा कर ही खत्म किया जा सकता है। महिलाओं का विकास दे"T का विकास है।

महिलाओं की साक्षरता, उनकी जागरुकता और उनकी उनकी उन्नति ना केवल उनकी गृहस्थी के विकास में सहायक साबित होती है बल्कि उनकी जागरुकता एवं साक्षरता दे” के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है । इसलिए सरकार द्वारा आज के युग में महिलाओं की शिक्षा और उनके विकास पर बल दिया जा रहा है गॉव और भाहर में शिक्षा के प्रचार प्रसार के व्यापक प्रयास किये जा रहे है। महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना और अन्याय के प्रति आवाज उठाने की हिम्मत प्रदान ही असल में नारी स"क्तिकरण है।

इधर कुछ वर्शों में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में वृद्धि हुई है जोकि बहुत ही चिन्तनीय है। भाहर भी महिलाओं के लिए असुरक्षित हो चले है कुछ असामाजिक तत्वों के कारण महिलाओं को परदें मे रखने की सोच का जन्म होता है किन्तु सबसे बडा सवाल यह है कि क्या वह पर्दे मे सुरक्षित रहेगी? घर से बाहर ही नही बल्कि घर में भी महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाओं के साथ ही घरेलू हिंसा और यौंन अपराधों मे वृद्धि हो रही है । पर्दे में या दरवाजों के भीतर महिलाओं को बन्दिनी बनाकर रखना इन सबका हल नही है । जरुरत है उन बन्द दरवाजों को खोलने की , रौनी को अन्दर आने देने की, उस प्रका”T में अपना प्रतिबिम्ब देखनें की, उसे निहारने की, निखारने की।

इस कडी मे एक और अहम दरवाजा आत्म निर्भरता और आर्थिक आत्म निर्भरता का भी है। जरुरत है हमें अपने अस्तित्व को पहचानने की और इसको बनाए रखने की और एक कदम बढ़ाने की । हम लडकियों को बचपन से सिखाया जाता है कि पाक कला और गृहकार्य में निपुणता ही एक नारी के लिए परिपूर्णता है।

क्या कभी किसी ने इस बात पर जोर दिया कि उनका पढ़ना लिखना भी उतना ही जरुरी है जोकि उनके बेहतर भविश्य के लिए बहुत जरुरी है। महिलाओं को आर्थिक रुप से आत्म निर्भर और सक्षम बनाना भी आज के समय उतना ही आव"यक है। आर्थिक रूप से सक्षम होना केवल परिवार के लिए नही अपितु अपने लिए भी आव"यक है

f"क्षा का महत्व तब पता चलता है जब परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा हो या किसी भी लडकी के वैवाहिक जीवन मे अचानक परे"Tानी आ जाए। तब शिक्षा और आत्म निर्भरता से ही एक लडकी को ना तो अपने माता- पिता पर और ना ही अपने पति पर निर्भर रहना पडता है। पैसे से खु"यां नही खरीदी जा सकती लेकिन एक सम्मान जनक जीवन जीने के लिए धन की आव"यकता होती है।

एक सुखी जीवनयापन के लिए किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी अति आव"यक है। जोकि हमारे कौ”ल में निखार लाता है और हमारे व्यवहारिक ज्ञान और अनुभव मे वृद्धी करता है। व्यवहारिकता, अनुभव और कौ”ल विपरित से विपरित स्थिति में भी जीवनयापन में सहायता करता है । ऐसा नही हैं कि अशिक्षित महिलाओं मे कौ”ल एवं हुनर कम है

कृशि, कुटिर उद्योग , पारम्परिक व्यवसाय, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय जैसे कार्यो से महिलाओं को अपने हुनर को बाहर लाना है और दे” की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना है । ग्रामिण क्षेत्रों में जहाँ शिक्षा के अभाव और आर्थिक पिछड़ेपन के और विकृत मानसिकता के कारण विभिन्न आडम्बरों एवं अन्धवि"वासों के चलतें महिलाओं का भाोशण किया जाता है। ऐसे स्थानों पर महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरुक किया जाना चाहिए एवं आत्मरक्षा के तरिके भी सिखाए जाने चाहिए।