नारी शिक्षा और सम्मान
November 16, 2019 • Sarvangin डॉ. इन्दिरा मिश्रा

पुरातन समाज में महिलाओं को देवी का रूप माना जाता था, परन्तु आज की स्थिति बिल्कुल ही विपरीत है। आज महिलाओं के साथ अभद्र एवं हिंसक व्यवहार किया जाता है। जब तक कि उनकी स्थति में सुधार  उन्हें समान दर्जा नहीं दिया जाता है तब तक अधूरे मन से महिलाओं को देवी मानना व्यर्थ है। सरकार द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने हेतु कई कार्यक्रम एवं जागरूकता अभियान चलाया जाता है, जिसके फलस्वरूप पूर्व की तुलना में महिलाओं की स्थिति थोड़ी बेहतर हुयी है। परंतु अभी भी महिलाओं के साथ आये दिन अभद्र व्यवहार, छेड़छाड़ आदि घटनाएं देखने को मिलती है। महिलाओं की जिन्दगी आज भी काफी जटिल है। इस जटिल जिन्दगी में महिला को अपना ख्याल तो रखती ही है, साथ ही पूरे परिवार का ध्यान भी रखना पड़ता है। महिला पूरी जिन्दगी बेटी, बहन, पत्नी, माँ, _ सास, दादी-नानी जैसे रिशतों को ईमानदारी से निभाती है। इन सभी रिशतों को निभाने के बाद  नौकरी कर घर के खर्चों में योगदान करती है ताकि अपना, अपने परिवार का, समाज एवं देश का मान-सम्मान बढ़ा सके। समाज में महिलाओं के कई  प्रेरणा स्वरूप है जिनका स्वयं का परिवार ही उनका साथ तैयार नहीं था, बावजद इसके उन्होंने अपने दम पर समाज की विचारधारा को बदल कर विचारधारा को बदल कर अच्छा मिशाल कायम किया है।लडकियां और महिलायें ऐसे ऐसे कीर्तिमान बना रही है जिस न सिर्फ परिवार या समाज को बल्कि पूरा देश को गर्व है।शिक्षा ही एकमात्र कारण है जिससे महिलाओं की स्थिति वर्तमान में बेहतर हयी है। शिक्षा के कारण ही लडाकयों व महिलाओं ने अपनी स्थिति पुरातन समाज की स्थिति की तुलना । में आज की स्थिति में बेहतर की है। एक प्रसिद्ध कहावत है कि अगर आप एक आदमी को शिक्षित कर रहे है तो आप सिर्फ एक । आदमी को शिक्षित कर रहे है परन्तु अगर आप एक महिला को  शिक्षित कर रहे है तो आप आने वाली पूरी पीढ़ी को शिक्षित कर । रहे है। समाज व देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है कि लड़कियों की शिक्षा हेतु बेहतर व्यवस्था की जाए, क्योंकि आने वाले । समय में इन्हें ही लड़कों के साथ कदम से कदम मिला कर समाज , _ को एक नई दिशा देना है। सच कहा जाए तो अगर कोई आदमी शिक्षित होगा तो वह सिर्फ अपना विकास कर पायेगा, परन्तु वहीं । अगर कोई महिला सही शिक्षा प्राप्त करती है तो वह अपने साथ-साथ पूर समाज का बदलने की ताकत रखती है। महिलाओं महिलाओं के बिना मनुष्य जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारत की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व महिलाएं महिलाओं करती है। अगर महिला की क्षमता पर ध्यान नहीं दिया गया तो देश की आधी जनसंख्या अशिक्षित रह जाएगी और अगर महिलाएं ही शिक्षित नहीं होगी तो वह देश कभी प्रगति नहीं कर पाएगा। हमें यह बात तो माननी ही पड़ेगी कि अगर एक महिला अनपढ़ होते हुए घर इतना अच्छे से संभाल लेती है तो पढ़ी लिखी महिला अच्छे से संभाल लेती है तो पढ़ी लिखी महिला समाज एवं देश को और भी है महिलाओं को जरूरत है कि वे अपनी क्षमता का प और भी बेहतर तरीके से संभाल लेगी। बस कि वे अपनी क्षमता को पहचाने और प्रयास करें कि अपने परिवार के साथ-साथ देश के विकास में मारवार के साथ-साथ देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। महिला परिवार बनाती है परिवार पर बनाती है घर समाज साह, परिवार घर बनाती है, घर समाज बनता है और समाज ही देश बनाता है। अर्थात महिला का । बनाता है। अर्थात महिला का योगदान हर जगह है, इसे नकारा नहीं जा सकता है। महिला की क्षमता को नजरअंदाज करके समाज की समाज की कल्पना ही व्यर्थ है। शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के बिना बिना परिवार, समाज एवं देश का का विकास नहीं हो सकता है। महिला यह बेहतर जानती है कि उसे कब, कैसे व किस तरह से समस्या का समाधान करना हा बस जरूरत है महिलाओं को हर संभव सहयोग करने की। समाज में और भी बेहतर स्थिति के लिए  लडकियों एवं महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।