प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एशियाई महिलाएँ लिख रही अपनी तक़दीर
November 16, 2019 • डॉ. इन्दिरा मिश्रा

प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एशियाई लेखिकाएं अपनी लेखनी के जरिए समाज के लिए आदर्शों के नए मानदेड कायम कर रही है। इन देशों की लेखिकाएं पक्षिमी देशों को आईना दिखा सकती है। कोलकाता सीमाओं में बटे होने के बाबजट ज्यादातर एशियाई देशों में महिलाओं की हालत कमोबेश एक जैसी ही है। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एशियाई लेखिकाएं अपनी लेखनी के जरिए समाज के लिए आदर्शों के नए मानदेड कायम कर रही है। इन देशों की लेखिकाएं पक्षिमी देशों को आईना दिखा सकती है।इस अफगानिस्तान को डोनिया गोबार का कहना था कि अफगानिस्तान में हालात भले बेहतर नहीं हों, उनकी लेखनी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा. वे कहती है कि रस अवे और अगली फेस आफ पावर जैसी कविताओं में ने इन समस्याओं का जिक्र किया है भूटान की कुंजोग चोडेन ने बताया कि अपने बच्चों को सामाजिक संरूति से अवगत कराने के लिए उन्होंने वर्ष 1980 में कलम उठाई थी। पाकिस्तान से आई किार नाहिद हांगकांग की सुन एग्नेस लेम, नेपाल की मंजू तिवारी और कंबोडिया की पुटसाता रियांग ने भी अपनी लेखनी के बारे में तफसील से जानकारी दी। र एशियाई लेखिकाओं की रचनाओं के संकलन स्पोकिंग फार माइसेल्फः एन्थोलएजो आफ एशियन वुमेंस राइटिंग है  इस पुस्तक की भूमिका मशहूर लेखिका कपिला वात्स्यायन ने लिखी है। पेंगुइन बुक्स इंडिया की ओर से प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन किया सुखापाल कुमार और मालाकी लाल पाल । पुस्तक को संपादक मालाओ लाल ने बताया कि इस पुस्तक में रशिया को अलेखिकाओं की कुल 76 रचनाएं है। इनमें कहानियां और कविताएं भी शामिल है। इनको उनकी मूल भाषा से अंग्रेजो से अनुदित कर पुस्तक में शामिल किया है। लाल ने कहा कि इस संकलन को रचनाएं एशियाई संबंधों को व्याख्यायित करती है। इसमें इस समूचे क्षेत्र की संवेदना है। वे कहती है कि यह पुस्तक एशियाई सांसतिक संबंधों को तलाशने की कोशिश है। इलाके के तमाम देशों में पहले काफी गहरे समितिक संबंध थे। हमारे आधुनिक संसार और इसकी सीमाओं ने हमें अलग-थलग कर दिया। लेकिन आपसी रिश्ते बने रहे। इस एकजुटता में स्त्री की भूमिका अहम है। पुस्तक को दूसरी संपादक सुता शादी के लिए पाल कुमार कहती हैं कि रशिमाई महिलाएं पकिमी देशों को महिलाओं से अलग है। पक्षिमी देशों को महिलाएं जहां समस्याओं से मुंह मोड़कर जोवर से भागने का प्रयास करती है. वहाँ रशियाई महिलाएं जीवन से जूझ कर उसे खूबसूरत बनाने में जुटी रहता है।वे कहती है कि इस संकलन को रचनाएं आत्मकथ्य की तरह है। एशियाई महिलाओं का जीवन बेहद कठिन लेकिन उन्होंने इस कठिनाई को खूबसूरत स्वरूप प्रदान किया है। कपिला वात्स्यायन ने कहा कि हरे हर शब्द पड़ते या सुनते बल अनुभवों और संवेदना में बदल जाते है। यह पुस्तक स्त्रियों के कथ्य को व्यापकता और उसकी गहराई को समग्रता के साथ पेश करती है। अफगानिस्तान से वियतनाम तक को महिलाओं को एक सूत्र में पिरोकर एक शक्तिशाली संवाद केरल कायम करना इसका सकार है। मशाल सेन कालमा और समाग में कोको भूमिका जान है।रचनायक भूमिका के मापनहलो की उपेक्षा को कया है यह पुस्तक जाने माने लेखक सुनील पोषाध्याय ने कहा कि एसया को सियों को विशिए राजा को पाकर उनको गहरी संवेदना का अहसास होता है। सम्मेलन में विभिल एशियाई देशों को महिलाओं ने अपनी-अपनी त्वचार सुलाई प्रभा खेतान पादेशम के स्टी संदीप भूतोडिया का काम कि अनुभवों एशियाई देशों में साकिस्बों को और मसर बनाने और महिलाओं व्यापकता को समस्याओं  के लिए साथ ही बौद्धिक बहस के लिए संवाद एक मंच की आवयशकता है