संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षण द्वारा महिला सशक्तिकरण के कतिपय प्रयास
November 20, 2019 • Sarvangin डॉ. इंदिरा मिश्रा

भारत में महिलाओं को संवैधानिक एवं कानूनी रूप से सशक्त बनाने हेतु संविधान में भी " स्त्रियों को पुरूषों के बराबर अधिकार देने का प्रावधान किया गया" _है। अनु. 15 और 16 (मौलिक अधिकार) तथा अनु. (38) और 39 _(राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धान्त) के द्वारा स्त्री और पुरूष के मध्य केवल लैंगिक आधार पर भेदभाव करने का निषेध किया गया है। अनु. 23 मानव के दुर्व्यापार, बेगार तथा इसी प्रकार के अन्य - बलात श्रम पर रोक लगाता है। अन. 43 के अन्तर्गत काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशा तथा प्रसूति सहायता के अधिकार का निर्देश राज्य को दिया गया है। इसी प्रकार अनु. 39 'घ' परूषों और स्त्रियों दोनों को समान कार्य के लिये समान वेतन का निदान त प्रावधान करता है। उपर्यक्त संवैधानिक प्रावधानों के अलावा भा स्त्रियों के कल्याण से सम्बन्धित अनेक विधनों का निर्माण हुआ जिनके चलते स्त्रियों की प्रस्थिति में सुधर आया है। प्रमुख (संशोधन विधेयक) 1929 2. हिन्दु महिलाआ क सपा अधिनियम निम्न प्रकार हैं- 1. हिन्द उत्तराधिकार अधिनियम अधिकार का अधिनियम, 1937 3. बागान श्रम अधिनियम, 1951 4. खान अधिनियम, 1952 5. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 6. दहज प्रतिबन्ध अधिनियम, 1961/1986 7. प्रसूति सुविधा अधिनियम, 1961 (8) बीड़ी एवं सिगार कर्मकार अधिनियम, 1966 9. ठेका श्रम अधिनियम, 1970 (10) समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 11. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 1976 12. स्त्री अशिष्ट निरूपण अधिनियम, 1986 13 सती निषेध अधिनियम, 1987 14. प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 15. भारतीय तलाक अधिनियम, । 2001 16. महिलाओं पर घरेलू हिंसा अधिनियम, 2001 17. परित्यक्ताओं के लिये गुजारा भत्ता अधिनियम, 2001 18. बालिका अनिवार्य शिक्षा एवं कल्याण विधेयक, 2001 आदि।